विधि-१.पदमासन या सुखासन में बैठ जाएं। २.दोनो हाथ घुटनों पर पलट कर रखें। ३. रीढ़ , गर्दन बिल्कुल सीधी।(प्रणायाम के समय इस बात पर विषेश ध्यान दें।) ४. जिह्वा को मोड़ें तालु से लगा लें। ५. नाभि का संकोचन करें। नाभि मूल रीढ़ से लगा लें। (पहला बंध , उडुयान बंध)
६. नीचे मूलबंध लगा लें।(मूलबंध का अर्थ है मूलाधार चक्र का संकोचन करना)। (दूसरा बंध , मूलबंध)। ७. गर्दन को हल्के से दबाएं।(तीसरा बंध, जालंधर बंध)। ८. तीनों बंध लगा कर नासिका से श्वास भरें और छोड़ें। श्वास भरने और छोड़ने में खरांटे का स्वर सुनाई दे। ( इस क्रिया को बारम्बार दोहराएं।)। लाभ- १.गले से संबंधी सभी रोग दूर होते हैं। २. थायराइड ,थायमस जैसी बीमारियां दूर होती हैं। ३.वाणी मधुर होती हैं।
यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो हमें जरूर बताए या हमें सीधे -सीधे मेल करें और रो यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो हमें जरूर बताए या हमें सीधे -सीधे मेल करें और ज़ाना योगा ब्लिस पेज पर लिखना न भूले |
Mail-Id= kavitamukesh1973@gmail.com
Mail-Id= kavitamukesh1973@gmail.com
Phone Number= 8459444497
Comments
Post a Comment