सातवीं स्थिति - स्वास भरते हुए शरीर को आगे खिसकाए कमर सीधी ,कमर नीचे,छाती आगे, गर्दन पीछे ,घुटने पृथ्वी पर , पंजे खड़े हुए ध्यान पूरा मूलाधार चक्र पर। लाभ-1. रीढ़ दोष समाप्त होता है | 2. फेफड़े मजबूत होते हैं|
3. हृदय से निकली हुई धमनियों की रुकावट दूर होती है | 4. आमाशय जिगर तिल्ली छोटी बड़ी आंखें निष्कासन अंगों सहित सभी सक्रिय होते हैं| 5. हथेलियों पर दबाव बनाने से यहां की नस नाड़ियों के अंतिम छोर सभी मजबूत होते हैं|
आठवीं स्थिति=पांचवी स्थिति के समान
नौवीं स्थिति =चौथी स्थिति के समान
दसवीं स्थिति =तीसरी स्थिति के समान
ग्यारहवीं स्थिति =दूसरी स्थिति के समान
बारहवीं स्थिति =पहली स्थिति के समान
नोट -1. श्वास छोड़ते हुए हाथों को प्रणाम करते हुए हाथो को नीचे कर लें |
2.दूसरी आवृति में पहले बाये पैर को पीछे लायेंगे | शेष स्थिति वैसी ही रहेगी |
3. सूर्य नमस्कार के बाद कम से कम दो मिनट का शव आसन जरूर कर लें |
यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो हमें जरूर बताए या हमें सीधे -सीधे मेल करें और रो यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो हमें जरूर बताए या हमें सीधे -सीधे मेल करें और ज़ाना योगा ब्लिस पेज पर लिखना यन भूले |
Mail-Id= kavitamukesh1973@gmail.com
Phone Number= 8459444497
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3. सूर्य नमस्कार के बाद कम से कम दो मिनट का शव आसन जरूर कर लें |
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