तीसरी स्थिति- 1. श्वास बाहर निकालते हुए ,भुजाएँ को कानों से सटाते हुए तथा मणिपुर चक्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए नीचे की ओर झुके|
2. दोनों हथेलियाँ पैरों के दाए -बाएं पृथ्वी पर स्थित करें |
3. अंगूठे ,अंगुलियाँ मिली हुई |
4. माथा घुटने पर लगा दें |
5. ध्यान पूरा मणिपुर चक्र पर लगा दें |
लाभ -1. इस स्थिति में मणिपुर चक्र के प्रभावित होने से जठराग्नि तीव्र होती हैं |
2. पेट के सभी अंग प्रभावित होते हैं|
3.रीढ़ का निचला भाग स्वस्थ एवं लचीला बनता हैं
4. फेफड़े मजबूत होते हैं |
5. टांगो की नसें एवं मासपेशियाँ मजबूत होती है l
यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो हमें जरूर बताए या हमें सीधे -सीधे मेल करें और रोज़ाना योगा ब्लिस पेज पर लिखना यन भूले |
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Phone Number= 8459444497
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2. पेट के सभी अंग प्रभावित होते हैं|
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