सुखआसन -यह एक सरल ध्यान संबंधी आसन हैं | इस आसन में आरामपूर्वक साधक काफी समय तक बैठ सकता हैं | लकिन ध्यान रहें रीढ़ ,कमर ,गर्दन सीधी होनी चहिए |
आसन की विधि -अपने आसन पर बैठे , दोनों पैरों को पहले सीधा फैला लें | एक पैर को दूसरे घुटने के नीचे रखें तथा दूसरे पैर को पहले घुटने के नीचे रखें | रीढ़ व गर्दन सामान्यतः सीधी हो | परन्तु तनावपूर्ण न हो | दोनों हाथ ज्ञान मुद्रा में हो | आँखे कोमलता से बंद रखें | मन को शांत करने का प्रयास करें |
ध्यान का केंद्र -आज्ञाचक्र
सुखासन से लाभ -
1. श्वास - प्रश्वास की गति सम रहती हैं |
2. इस आसन में बहुत देर तक बैठने से देह ,प्राण ,इन्द्रियाँ व मन में कम से कम थकावट होती है |
3. सही ढंग से बैठने की आदत बनती हैं |
4. मनन ,गहन चिंतन ,श्रवण ,समाधि में देर तक बैठने के लिए यह आसन उपयोगी हैं |
5. इसके निरन्तर अभ्यास से मन शांत रहता हैं |
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