पांचवी स्थिति -1. श्वास छोड़ते हुए दूसरा भी पैर पीछे ले जाये |
2. पूरा शरीर पीछे की ओर धकेले एड़ी आसन से लगाने का प्रयास करें |
3. एड़ी ,पंजे मिले आसन पर लगाये | 4 . ठोड़ी कंठकूप में लगा दे |
5. हथेलियाँ ,पंजे एक बार रखने पर खिसकाए नहीं |
6. ध्यान सहस्रसार चक्र पर रखें |
लाभ -1. पिण्डलियों में उभरी हुई नसों में राहत मिलती हैं |
2.टांगो के जोड़ पुष्ट होते हैं |
3.रक्त शोधन की क्रिया तीव्र होती हैं | 4. मस्तिष्क में शक्ति का संचार होता हैं |
5. कंधे ,कलाई और अंगुलियों तक के जोड़ प्रभावित होते हैं |
6.थायराइड ,पैरा -थायराइड ग्रंथियों का स्त्राव नियंत्रित रहता हैं |
7. शरीर के दो विभाजन होने से शक्ति का स्त्राव दो दिशाओं में होता हैं|
यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो हमें जरूर बताए या हमें सीधे -सीधे मेल करें और रोज़ाना योगा ब्लिस पेज पर लिखना यन भूले |
Mail-Id= kavitamukesh1973@gmail.com
Phone Number= 8459444497
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3. एड़ी ,पंजे मिले आसन पर लगाये | 4 . ठोड़ी कंठकूप में लगा दे |
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6. ध्यान सहस्रसार चक्र पर रखें |
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2.टांगो के जोड़ पुष्ट होते हैं |
3.रक्त शोधन की क्रिया तीव्र होती हैं | 4. मस्तिष्क में शक्ति का संचार होता हैं |
5. कंधे ,कलाई और अंगुलियों तक के जोड़ प्रभावित होते हैं |
6.थायराइड ,पैरा -थायराइड ग्रंथियों का स्त्राव नियंत्रित रहता हैं |
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