सूर्य नमस्कार - सूर्य सारे ब्रह्मांड को शक्ति देता हैं | इसमें पांच अग्नियाँ व सात विधुत केंद्र हैं | हमारे शरीर में भी सात प्राण प्रवाहित केंद्र हैं | जो प्राणिक नाड़ीयो सहित सूर्य नमस्कार की 12 स्थितियों से प्रभावित होते हैं | इसके 12 मन्त्र हैं तथा 12 स्थितियाँ हैं ||
सूर्य नमस्कार युवा वर्ग के साधकों के शरीर को सुडौल ,सक्रिय तथा कांतिमय बनता हैं| रोज़ सूर्य नमस्कार करने वाला साधक कभी बीमार नहीं होता| हर वर्ग के लिए यह उपयोगी हैं |सूर्य नमस्कार के 12 केन्द्रों पर दीर्घकालीन अभ्यास से विभिन्न शक्तियाो का विकास होता हैं |
पहली स्थिति -इस स्थिति में सूर्य का आवाहन दोनों भौहो के मध्य आज्ञाचक्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए सम्पूर्ण शरीर के अंगो को आज्ञा दी जाती हैं |
विधि -1. एड़ियां मिली ,पंजे खुले ,सीधे खड़े हो |
2. दोनों भुजाएं शरीर के साथ सटी हुई |
3. दोनों हाथ प्रणाम मुद्रा में,अंगुलियाँ तथा अँगूठे मिलें ,अंगूठा ह्रदय मूल में ,कलाई से कोहनी तक भुजा पृथ्वी के समानान्तर, कंधे स्वाभाविक स्थिति में |
4. आंखे कोमलता से बंद |
5. ध्यान भूमध्य में(दोनों भौहो के मध्य )आज्ञा चक्र पर |
6. सूर्य का मित्र के रूप में उच्चारण करें (ॐ मित्राय नमः ,ॐ सूर्य नमः )|
लाभ -1. ग्रंथि -स्राव नियंत्रित होती है |
2 आज्ञा चक्र प्रभावित होता है |
यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो हमें जरूर बताए या हमें सीधे -सीधे मेल करें और रोज़ाना योगा ब्लिस पेज पर लिखना न भूले |
Mail-Id= kavitamukesh1973@gmail.com
Phone Number= 8459444497
सूर्य नमस्कार युवा वर्ग के साधकों के शरीर को सुडौल ,सक्रिय तथा कांतिमय बनता हैं| रोज़ सूर्य नमस्कार करने वाला साधक कभी बीमार नहीं होता| हर वर्ग के लिए यह उपयोगी हैं |सूर्य नमस्कार के 12 केन्द्रों पर दीर्घकालीन अभ्यास से विभिन्न शक्तियाो का विकास होता हैं |
पहली स्थिति -इस स्थिति में सूर्य का आवाहन दोनों भौहो के मध्य आज्ञाचक्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए सम्पूर्ण शरीर के अंगो को आज्ञा दी जाती हैं |
विधि -1. एड़ियां मिली ,पंजे खुले ,सीधे खड़े हो |
2. दोनों भुजाएं शरीर के साथ सटी हुई |
3. दोनों हाथ प्रणाम मुद्रा में,अंगुलियाँ तथा अँगूठे मिलें ,अंगूठा ह्रदय मूल में ,कलाई से कोहनी तक भुजा पृथ्वी के समानान्तर, कंधे स्वाभाविक स्थिति में |
4. आंखे कोमलता से बंद |
5. ध्यान भूमध्य में(दोनों भौहो के मध्य )आज्ञा चक्र पर |
6. सूर्य का मित्र के रूप में उच्चारण करें (ॐ मित्राय नमः ,ॐ सूर्य नमः )|
लाभ -1. ग्रंथि -स्राव नियंत्रित होती है |
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