MOVEMENTS OF NECK (HINDI VERSION)




















अब हम गर्दन की क्रियाएँ जानेंगे जिन क्रियाओ के द्वारा हम अपनी गर्दन ओर कंधो को प्रभावित कर सकते है   ये क्रियाए हम पद्मासन , सुखासन ,वज्रासन या ख़ड़े हो कर भी कर सकते है | प्रत्येक अवस्था में रीढ़ को सीधा   रखें  | जोड़ों के दर्द के लिए ये क्रियाये बहुत प्रभावकारी हैं |

१.गर्दन को धीरे -धीरे दाई ओर घुमाये इतना घुमाये की गर्दन को  कंधे से आगे निकालने का प्रयास  करे |
  यही क्रिया बाई ओर से करे | (प्रत्येक क्रिया को ३ से ५ बार अवश्य करें )

२.दाया कान दाये कंधे पर ले जाने का प्रयास करें लकिन कंधे को ऊपर ना करें यही क्रिया बाई ओर से करे | 

३. अब गर्दन को दाये से बाई ओर घुमाये ( ३ से ५ बार ) यही क्रिया बाये से दाई ओर घुमाये  | 

४. गर्दन को धीरे -धीरे पीछे ले जाए इतना पीछे कि गर्दन का ऊपरी हिस्सा कमर पर लग जाए फिर गर्दन धीरे -      धीरे आगे ले जाए (जिन साधकों को सर्वाइकल है वह साधक गर्दन आगे ना झुकाए सामने रखें )

५.अब फिर गर्दन को अधिक से अधिक  पीछे ले जाए और बढ़े से बड़ा मुख खोले ,कुछ समय रुके फिर गर्दन           वापिस ,क्रिया बार -बार दोहराये | 

६ .दोनों हाथों को दाये -बाये तानते हुए  ऊपर ले जाए ,दाये हाथ से बाए हाथ की कलाई को पकड़े और एक हाथ        से दूसरे हाथ को दाई ओर  खींचे |यहीं क्रिया बाई और करें क्रिया दोहराये|                                                   

७.दोनों हाथ कमर पर रखें कंधो को आगे से पीछे की ओर गोलाकार घुमाये क्रिया पूरी करने के बाद विपरीत            घुमाये |

८. दोनों हाथों की कमर के पीछे ग्रिप करें हथेलियाँ अच्छी तरह मिलाये और कोहनियां सीधे करने का प्रयास          करें,  क्रिया दोहराये |

९.दोनों भुजाये नीचे ताने एक -एक कंधे को बारी -बारी उचकाए |

१०.दोनों हाथों की उंगलिओं को कंधे पर रखे | कोहनियां मिलाये बाहर की ओर कोहनी खोले | दाये -बाये घुमाये         और कोहनियो को घड़ी की सुई की तरह घुमाये आगे की ओर फिर उल्टी दिशा में घुमाये |

११.दाई हथेली से दाये कंधे के पीछे थपथपाएं ,फिर बाएं कंधे को | इसी  तरह बायीं हथेली से बाएं कंधे के नीचे           पीठ थपथपाएं |

१२.भुजाएं दाये -बाएं फैलाये | एक हाथ की अंगुलियों को कंधे से स्पर्श करें | एक  फैला रहे  | पहली भुजा फैलाए         तो दूसरी  भुजा कंधे पर रखें | क्रिया दोहराये ,इसी तरह हाथो को सामने ले और दोहराये |



   लाभ ;-इन क्रियाओं के द्वारा हमारा सर्वाइकल ठीक होता है ,हमारे कंधे पुष्ट होते हैं | आज की जीवन शैली                   इस दोष का मुख्य कारण है | इन सूक्ष्म क्रियाओ के द्वारा हमारे शरीर के जोड़ प्रभावित होते है | उम्र के              तीसरे पड़ाव  पर  इन सभी हाथ, पैरो और गर्दन की सूक्ष्म क्रियाओं को ही वृद्ध जन सरलता से कर पाते                है  और राहत  पाते हैं |





यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो हमें जरूर बताए या हमें सीधे -सीधे मेल करें और रोज़ाना योगा ब्लिस           पेज पर लिखना न भूले |
      
Mail-Id= kavitamukesh1973@gmail.com
Phone Number= 8459444497

Comments

Post a Comment