सबसे पहले यह समझना बहुत जरुरी है कि ध्यान क्या है?सरल भाषा मे ध्यान वह क्रिया है जिसमें हम सभी कार्य सजगता से करते है जैसे ध्यान से खाना ,पीना ,चलना ,पढ़ना ,उठना ,बैठना आदि यदि हम कोई भी कार्य थ्यान से नहीं करेगे तब हम कभी कोई भी कार्य नहीं कर सकते ,
अंग्रेज़ी भाषा मे ध्यान को Meditation भी कहा जाता है जब हम सभी कार्य ध्यानपूर्वक करते है तो ध्यान की ओर भी मनुष्य जीवन मे कभी ना कभी जाने लगता है तो इसे ईश्वर का इशारा समझिए की ईश्वर भीचाहताहै कि मानव ध्यानस्थ हो कर मेरे समीप आए | ध्यान के द्वारा जितना ज्ञान अंदर जाएगा उतना हीज्ञान के साथ ध्यान आत्मा में गहरा होता जायगा | ध्यान मनुष्य की उन्नति का दरवाजा है ध्यान करने से मन शांत रहता है और जब
मन शांत होगा तभी जीवन को एक नई दिशा मिलेगी |
१ ध्यान के द्वारा सकारात्मकता जीवन में आने लगती है |
2 आत्मा परमात्मा का साक्षात्कार होने लगता है |
३ नकारात्मक लोग आपसे दूर होने लगते है |
४ सभी अधूरे कार्य पूर्ण होने लगते हैं |
५ सबसे अधिक लाभ तब मिलता हैं जब हम ध्यानवस्था में बैठते हैं तब हमारी शुषुम्ना नाड़ी
प्रभावित होती हैं जिसके द्वारा बहुत से रस निकलते हैं जो हमारे शरीर के लिये बहुत ही लाभकारी होते हैं जो शरीर को रोगों से बचाते हैं |
६ अनिद्रा की बीमारी दूर होती हैं |
मन शांत होगा तभी जीवन को एक नई दिशा मिलेगी |
१ ध्यान के द्वारा सकारात्मकता जीवन में आने लगती है |
2 आत्मा परमात्मा का साक्षात्कार होने लगता है |
३ नकारात्मक लोग आपसे दूर होने लगते है |
४ सभी अधूरे कार्य पूर्ण होने लगते हैं |
५ सबसे अधिक लाभ तब मिलता हैं जब हम ध्यानवस्था में बैठते हैं तब हमारी शुषुम्ना नाड़ी
प्रभावित होती हैं जिसके द्वारा बहुत से रस निकलते हैं जो हमारे शरीर के लिये बहुत ही लाभकारी होते हैं जो शरीर को रोगों से बचाते हैं |
६ अनिद्रा की बीमारी दूर होती हैं |
७ डिप्रेशन दूर होता हैं |
=> अगलेसंस्करण में ध्यान का समय और करने का तरीका बताया जायगा |ध्यान रोज़ कितना करना चाहिये और कैसे ?
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