How to master the art of meditation Part-1

जब आप कभी किसी व्रत का संकल्प लेते हैं | तब उसे पूर्ण करने की कोशिश करते हैं | इसी प्रकार ध्यान योग को भी व्रत की भांति संकल्प शक्ति से ही सिद्ध कर सकते हैं | अपने सद्गुरु की कृपासे ही मैं आप सब तक योग के विषय में जानकारी लिख पा रही हूँ | योग से मैं १५ वर्षो से लोगो की निष्काम सेवा करती आ रही हूँ कुछ समय से मेरा भतीजा मेरे  पास आ रहा था | मै मेरे  घर में भी ध्यान की कक्षा लेती हूँ | उसे भी जागरूकता हुई और मेरे घर वो भी ध्यान करने लगा | तभी एक दिन उसने मुझे लिखने के लिए कहा उसीसे मुझे लिखने की प्ररेणा मिली | आप सभी पढ़ने और समझने वालो का भी मुझे  सहयोग  चहिये तभी यह संभव हो पाएगा |                                              जिन साधको को केवल ध्यान योग ही करके ब्रह्म प्राप्ति की ओर जाना है ये ध्यान  योग सिद्धि केवल उन्ही साधको के लिए है | साधक अपने ह्रदय में प्रतिज्ञा करके बैठे कि एक माह तक मैं कम से कम एक पहर (तीन घंटे )बैठूँगा  ही चाहे तन - मन में कितनी  ही  पीड़ा क्यूँ ना हो ?पैरों में पीड़ा हो तो आसन खोल दे | कुछ पल पश्चात् पैरों को संयमित करने के लिए पहले जो पैर ऊपर  था उसे  नीचे रख ले और नीचे वाले पैर को ऊपर  रख ले | जब इस आसन से भी पैर दुखने लगे तब कोई अन्य आसन कर ले |
ध्यान के समय नींद  आने लगे तब ऐसा समझ कर आँखों को खोल दे कि यह तामसवृति प्रकट हो रही है |  कुछ समय व्यतीत होने पर वह भी चली जाएगी फिर ह्रदय में प्रकाश प्रकट होने से पुनः नेत्र बंद हो जाएगें एवं जब वह प्रकाश भी चला जाएगा तो विचारों का आगमन  होगा और उसमें चंचल मन अत्यधिक बकवास करने लगेगा |
            पुनःआँखों को खोल कर इस प्रकार देखें कि  ह्रदय में कोई बात कर रहा हो | इस प्रकार जब आधा घंटा बीत जायेगा तो वे कल्पनाएँ भी कहीं चली जाएगी | जब न तो प्रकाश ,न नींद और न ही किन्ही कल्पनाओ का आगमन होता है | तब मन में अत्यंत उच्चाटन हो जाता हैं और ध्यान थोड़ा भी अच्छा नहीं लगता | कुछ साधक तो उसी समय ध्यान छोड़ कर भाग जाते है ,नित्यप्रति ऐसा ही होता है ,जबकि यथार्थ में वही श्रण प्रतीक्षा का होता है | अतः साधक उस घोर उच्चाटन को सहन करें |
          हे मित्रों !
 विशेष नहीं बस आधा घंटा ही सहन करना है | उसमें ही बहुत से झंझट समाप्त हो जाएंगे | अतः   इसी प्रकार आज (नित्यप्रति )तीन घंटे पूर्ण करें तो एक माह में ध्यान की बहुत सिद्धि हो जाएगी |  इसी प्रकार प्रातः काल तीन घंटा सायं  को दो घंटा ध्यान करें |
    यही विषय आगे बढ़ाएंगे |
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