Time for meditation and procedure

ध्यान का समय प्रातः या सायकालीन करना चहिये | ध्यान हमेशा सामान्य साधक  को अपना कीमती समय निकाल कर अपनी उम्र के बराबर मिनट आवश्य करना चाहिए  | जैसे किसी साधक की उम्र ५५ वर्ष है | तो उसे 
५५  मिनट ध्यान करना चाहिए | ऐसे ही किसी साधक की उम्र यदि २६ और ३८ वर्ष है तब ध्यान २६ मिनट और ३८ मिनट जरूर करना चाहिए | साधक को समय के अनुसार इससे अधिक भी ध्यान कर सकता है।लेकिन जिन साधको को  केवल साधना करनी हैं, उनके  लिये नियम अलग है।जो आपको आने  वाले ध्यान के संस्करण मे बताया जाएगा।
ध्यान के लिए उपयुक्त आसन का चुनाव करना चाहिए जिस आसन मे साधक रीढ़ को बिल्कुल सीधा करके बैठे।रीढ़ सीधी होगी तभी साधक ध्यान का पूर्ण लाभ ले सकता है।जैसे स्वास्तिकान आसन, पदमासन, वज्र आसन आदि।आसनो की संख्या बहुत हैं जिस भी आसन मे साधक रीढ़ को सीधा करके बैठे तभी साधक ध्यान का पूरा लाभ उठा सकता है | पिछले  संस्करण में मैंने बताया था कि सुषुम्ना नाड़ी ध्यान के समय प्रभावित होती है | हमारे
शरीर में ७२ हज़ार नस नाड़ियाँ हैं | जिनमें से तीन नाड़ियां महत्वपूर्ण है इंगला ,पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी | इन नाड़िओ को गंगा ,यमुना और सरस्वती भी कहते है | ध्यान के समये सुषुम्ना नाड़ी अधिक सक्रिय हो  जाती है | और हमारी कुंडलिनी  शक्ति को प्रभावित  करती है और धीरे -धीरे  कुंडलिनी शक्ति का\मुख ऊपर की ओर होने लगता है | इसके विषय में आगे संस्करण में लिखेंगे | ध्यान करने से मन एकाग्र होता है | दिनप्रतिदिन साधक उन्नति के मार्ग पर चलता है |\| ये सब  विश्वास कीजिये अनुभव से ही मैं लिख पा रही हूँ | आने वाले संस्करणों में मैं अपनी कुछ अनुभूतियाँ भी आप सबसे शेयर करुँगी | एक अच्छे साधक को ध्यान योग कैसे सिद्ध करना चाहिए अगले संस्करण में बताया जाएगा |
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